योगतरंगिणी (दो भागों में)

योगतरंगिणी (दो भागों में)

Be the first to review this product

Availability: In stock

Rs2,590.00 

Quick Overview

आचार्य त्रिमल्लभट्ट द्वारा रचित ग्रन्थ ‘योग तरंगिणी’ आयुर्वेद आधारित एक महत्वपूर्ण ग्रन्थ है । यह ग्रन्थ सर्व वैद्यक संहिताओं का सार संग्रह है। तत्कालीन सभी प्रमाणिक ग्रन्थों का उपयोग कर इसे संग्रह ग्रन्थ का रूप दिया गया है । इस ग्रन्थ में औषधि योगों का बृहत् संग्रह है । ये सभी औषधि योग विविध प्राचीन एवं तत्कालीन प्रचलित ग्रन्थों से संग्रहीत हैं । आयुर्वेदीय आर्ष एवं रसौषधियों तक के प्रचलित हर तरह के योग इसमें दृष्टव्य हैं ।
महर्षि पतंजलि के अनुसार ‘योगश्चित्तवृत्तिनिरोधः’ अर्थात चित्त की वृत्तियों को वश में रखना ही योग है । मनुष्य योग के द्वारा सभी चिन्ताओं का परित्याग कर सकता है । ‘योगतरंगिणी’ ग्रन्थ यद्यपि आयुर्वेद औषधि के उपचार का परिबोध करता है, लेकिन भारतीय प्राचीन वाड्.मय में योग की जो पद्धतियां निरूपित हुई हैं, उसकी परिधि में इसे देखते हुए यह निर्विवाद कहा जा सकता है कि यह ग्रन्थ आयुर्वेद के साथ योग के विराटत्व से विभूषित चिकित्सा प्रणाली का महाकोश है । आचार्य त्रिमल्लभट्ट ने प्राचीन काल में योगतंरगिणी की रचना की थी । यह ग्रन्थ उसी का नवीनतम संशोधित एवं सवंर्धित संस्करण है ।
प्रस्तुत ग्रन्थ भारतीय चिकित्सा-पद्धति को समृद्धि प्रदान करता है और आयुर्वेद की विकास-परम्परा को नवीनतम विधि-प्रक्रिया से विभूषित करता हुआ गौरवशाली बनाता है । सच ही कहा गया है, ‘योगःकर्मस्तु कौशलम’ मसलन कार्य में कुशलता को ‘योग’ कहते है। इस कसौटी से पृथक यह ग्रन्थ भारतीय चिकित्सा-ज्ञान और उपचार-विज्ञान को एकमेव रूप में हर व्यक्ति के लिये दुःख भंजन मंत्र सा है । ग्रन्थ का अधुनातम परिवेश और इसके परिप्रक्ष्य में जो चिकित्सीय-संज्ञानपरक क्रम बद्धता है, वह औषधिक उपादेयता से परिसिक्त और परिनिष्ठ है ।

Additional Information

Sub Title No
Author कमलेश शर्मा
ISBN 10 Digit No
ISBN 13 Digit 9788187471448
Pages No
Binding Hardcover
Year of Publication 2008
Edition of Book No
Language Hindi & Sanskrit
Illustrations No

Product Tags

Use spaces to separate tags. Use single quotes (') for phrases.