वैदिक वाङ्मय - एक झलक

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Quick Overview

वैदिक वांङमय की सम्पूर्ण परिभाषा में वेदों को सबसे प्राचीन और श्रेष्ठ परिगणित किया गया है।  वेदों  का अर्थ है ज्ञान।  ज्ञान के सदृश्य इस संसार में कुछ भी पवित्र नहीं है। सत्य में भी ज्ञान का वास है।  वैदिक वांङमय से पूर्णतः परिबोध कराती वेद-विधा के मनीषी विद्वान प्रो. किरीट जोशी की यह कृति अपनी नविनोपलब्धि का बोध कराती है।


वैदिक वांङमय के सभी ग्रन्थ ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद, अथर्ववेद, ब्राह्मण-ग्रन्थ आरण्यक, उपनिषद आदि अपनी म्हणता और मूलवत्ता में मानवता के मेरुदण्ड हैं।  यही विशिष्टता भारतीय संस्कृति की गरिमामयी पहचान है।  संस्कृति किसी देश, समाज और व्यक्ति के अंतरंग जीवन की महाकाव्यात्मक शैली है।  यह मानव जीवन को संस्कारित करती है।  इसकी वैश्विक अवधारणा है 'सर्वेभवन्तु सुखिनः' । सौम्यता, सहिष्णुता, समाविशिका के पुष्ट प्रस्तुत पुस्तक समष्टिबोध का व्यापक फलक की विशेषता दर्शाती है। 


विद्वान लेखक ने पुस्तक के सृजन में अपने मौलिक विचारों से चिंतन के अनेक नए आयाम, नयी उद्भावनाएं, नई संकल्पनाएँ पेश की है।  इन  अवधारणाओं के परिप्रेक्ष्य में धर्मों, नैतिकताओं, आदर्शवादी मूल्यों, मान्यताओं  की प्रबल प्रतिष्ठा की गयी है जिससे मानव-जीवन का पथ प्रशांत होता है।  तात्पर्य है, श्री अरविंदो ने भी जिन ब्रह्माण्डीय शक्तियों, सत्ताओं का प्रतिपादन किया है, प्रो जोशी ने उनका विधिवत बारीक विवेचन-विश्लेषण करते हुए प्रतिमान स्थापित किया है। 


अतः अपनी समग्रता में यह पुस्तक धर्म, ज्ञान, कला और जीवन-मूल्यों की स्थापना करती हुई आद्यन्त अपने अर्थ-अन्वेषण से समृद्ध परम्परा का साक्षात्कार कराती है और भाषिक सरलता-सहजता सुबोध और अनिवंती इसकी अतिरिक्त विशिष्टता है।

Additional Information

Sub Title No
Author किरीट जोशी
ISBN 10 Digit No
ISBN 13 Digit 978818747170684
Pages 160
Binding Hardcover
Year of Publication 2012
Edition of Book First
Language Hindi
Illustrations No

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