रामायण - मूलकथा (तीन भागों में)

रामायण - मूलकथा   (तीन भागों में)

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Quick Overview

वाल्मीकि गिरा सम्भूता राम-सागर गामिनी ।
पुनाति भुवन-पुण्य रामायण-पयस्विनी ।।


रामायण भारतीय संस्कृति के तीन महाकाव्यों में से एक महान महाकाव्य है । इसे भारतीय संस्कृति का आदिग्रंथ मानते हैं । राष्ट्रीय एकता एवं सांस्कृतिक चेतन के इस अक्षय प्रकाश-केंद्र में श्री राम के जीवन की अनंत यात्रा है - अनवरत यात्रा, जो अनादि काल से आज तक अपने तमाम उपोदघातों और अंतराओं के साथ निरंतर प्रवाहित है ।


इस प्राचीन पौराणिक महान ग्रन्थ की कथमकता के परिप्रेक्ष में उसकी मौलिकता को उद्घाटित करते हुए हिंदी के सुप्रतिष्ठित साहित्यकार डॉ. राहुल ने 'रामायण : मूलकथा' का प्रणयन किया है । विद्वान लेखक ने मूलकथा की कथात्मकता को तीन भागों में विभक्त किया है । प्रथम भाग में बालकाण्ड से किष्किन्धाकाण्ड तक की कथा है, द्धितीय भाग में सुन्दरकाण्ड से युद्धकाण्ड (लंकाकाण्ड) की सत्ता को लिखा गया है और अंतिम खंड - तीसरे भाग में उत्तरकाण्ड की कथा (चार सर्गों में) निबद्ध है। तीनों खण्डों की भूमिकाओं में लेखक ने भारतीय संस्कृति के गौरवपूर्ण परिदृश्य का विराट चित्रण प्रस्तुत किया है जो बहुत रुचिकर एवं ज्ञानवर्धक है।


रामायण की मूलकथा पर केंद्रित यह हिंदी अनुवाद का प्रथम महाग्रंथ है । प्रथम भाग के 'आत्मचिंतन' के अंतर्गत भगवान श्री राम के पूर्वजों का इतिवृत्तात्मक परिचय प्रस्तुत किया गया है तो तीसरे भाग में रावण और उसके पूर्वजों का वंश-वृक्ष है जो देश-विदेश के रामकथा मर्मज्ञों के लिए, सामान्य पाठक-वर्ग, हर पुस्तकालय और शोधार्थियों के लिए बहुत ही उपयोगी सिद्ध होगा । इस पुस्तक को पढ़े बिना भारतीय संस्कृति का ज्ञान अधूरा जैसा लगेगा । निश्चय ही नयी जानकारियां लिए यह अपनी पौराणिक और ऐतिहासिक अर्थवत्ता सिद्ध करती है।


रामायण की मूलकथा का सम्बन्ध वास्तव में भारतीय जन-जीवन और संस्कृति से है जो भारतीयता का गौरव उद्घाटित करता है । रामायण के गुह्य महत्व को भी यह ग्रन्थ रेखांकित करने में पूर्णतः सक्षम हुआ है । जिससे अन्य ग्रंथों की पंक्ति से पृथक इसका वैभव प्रतिपादित होता है।


 

Additional Information

Sub Title No
Author डॉ. राहुल
ISBN 10 Digit 8187471379
ISBN 13 Digit 9788187471370
Pages No
Binding Hardcover
Year of Publication 2007
Edition of Book First
Language Hindi
Illustrations No

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