रैगिंग: एक आतंक

रैगिंग: एक आतंक

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‘‘रैगिंग: एक आतंक’’ पुस्तक समाज की एक ऐसी तस्वीर सामने लाती है, जो सच्ची होने के बावजूद हमेशा छिपायी जाती रही । यह किताब रैगिंग मुद्दे पर ऐतिहासिक पहल कि लिए सर्वोच्च न्यायालय को समाज का सलाम है । पुस्तक यह दर्शाती है कि किस तरह राघवन समिति की रिपोर्ट में ऐसा क्या है जिसकी वजह से रैगिंग से त्रस्त शिक्षा व्यवस्था ने एक राहत की सांस ली है । पुस्तक यह भी सफलता पूर्वक इशारा करती है कि गैर सरकारी संगठन ओर मीडिया यदि सतर्क हो जाएं तो व्यवस्था की नींद टूटनी तय है । किताब साथ ही चह चेतावनी देती है कि स्कूलों की ओर अनदेखी करना अब खतरनाक साबित हो सकता है । यह कृति बच्चों की परवरिश के लिए फिल्मी सितारों से लेकर खिलाडि़यों तक के अनुभव को पेश करती है, जिससे वे रैगिंग की खैफनाक दुनिया में खो जाने से बच जाएं । किताब नया दाखिला लेने वाले विद्यार्थियों को यह समझाती है कि रैगिंग से किस तरह बचा जा सकता है । साथ ही सीनियर विद्यार्थियों को वे सूत्र भी देती है जिनके बल पर वे वास्तविक नेतृत्व-क्षमता हासिल कर सकते हैं । कुल मिलाकर यह दर्द का सामना कराने के साथ-साथ उम्मीद के सूरज की भी झलक दिखाती है।  

Additional Information

Sub Title No
Author गुलशन नवीन
ISBN 10 Digit No
ISBN 13 Digit 9788190953238
Pages 218
Binding Hardcover
Year of Publication 2014
Edition of Book First
Language Hindi
Illustrations Yes

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