नारद त्रिस्कन्ध ज्योतिष

नारद त्रिस्कन्ध ज्योतिष

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Quick Overview

नारद त्रिस्कन्ध ज्योतिष केवल ज्योतिष का ग्रन्थ नहीं है बल्कि भारत के रीति रिवाजों, संस्कार, संस्कृति, समस्त खगोलीय ज्ञान का सम्मलित अभूतपूर्व ग्रन्थ है ।  ज्योतिष में ऋषि पराशर, गौतम, भृगु, सौनक आदि के द्वारा लिखे ग्रंथों में से सबसे महत्वपूर्ण नारद त्रिस्कन्ध ज्योतिष है ।  कारण किसी भी ग्रन्थ में गणित (त्रिकोणमिति, ज्योमिति, कैलकुलस, सॉलिड, अलजेब्रा, कोआर्डिनेट) की गणना  जिसमे दशमलव के 1018 तक का गणित हो, दिखाई नहीं देता ।  त्रिस्कन्ध (गणित-फलादेश-मुहूर्त) एक साथ किसी ग्रन्थ में उपलब्ध नहीं है । 


इसके अतिरिक्त विविध मुहूर्त, ग्रहण, गर्भ ज्ञान, पूर्वजन्म ज्ञान, राजयोग, संवत्सर फल, आय के साधन, रत्न, हाथी-घोड़े (वाहन के क्रय-विक्रय, पितृकर्म (श्राद्ध), खेती, वर्षा, विवाह मेलापक, वास्तु (गृह निर्माण), यात्रा (लाभ), प्रश्न , शकुन, मूर्तिविकार, मृत्युयोग, अंतरिक्ष विकार, पशु-पक्षी आदि 84 लाख योनियों का ज्ञान, मूर्तिविकार (दूध पीना आदि), गृहों से संसार के देशों में पड़ने वाला प्रभाव, आदि अनेकों प्रकार के वर्णन वर्णित हैं।


आज हम अपने पुरातन ज्ञान और जैव विविधता के संरक्षण में स्वयं ही उपेक्षा के कारण असहाय हैं ।  पुस्तकों का स्थानपन्न टी. वी. नहीं हो सकता । ज्योतिष के ग्रंथों का पहले भी और इस सभ्यता के बाद में भी सर्वाधिक उपयोग रहेगा ।

Additional Information

Sub Title No
Author कमल प्रकाश अग्रवाल
ISBN 10 Digit 8187471026
ISBN 13 Digit 9788187471028
Pages No
Binding Hardcover
Year of Publication 2000
Edition of Book First
Language Hindi
Illustrations No

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